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The longing of Laxman – An excerpt from Kurukshetra Yuddha-2, Ardhasatya

……………………………………. दुर्योधन के जाने के पश्चात्‌ लक्ष्मण बहुत देर वहीं उसके तम्बू के बाहर खड़ा रहा। चहुँ ओर से उसे सन्तुष्ठ क्षत्रियों के स्वर सुनाई देने लगे। सम्शप्तकों की प्रतिज्ञा से आश्वस्त वे योद्धा फिर से मदिरा और स्त्रियों में … Continue reading

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